कोण और कोणों के प्रकार 6th से 10th कक्षा

आईये जानते है : कोण और कोणों के प्रकार के बारे में

ज्यामिति यानी Geometry में कोण एक बहुत ही महत्वपूर्ण अवधारणा है। जब हम किसी दरवाजे को खोलते हैं, घड़ी की सुइयों की स्थिति देखते हैं, सड़क के मोड़ को समझते हैं या किसी त्रिभुज की आकृति बनाते हैं, तब किसी न किसी रूप में कोण हमारे सामने मौजूद होता है। इसलिए कोण केवल किताब में बना हुआ कोई चिन्ह नहीं है, बल्कि यह हमारे आसपास की वस्तुओं और आकृतियों को समझने का एक महत्वपूर्ण गणितीय तरीका है।

स्कूल स्तर पर कोण और कोणों के प्रकार को अच्छी तरह समझ लेना आगे आने वाले अध्यायों जैसे त्रिभुज, चतुर्भुज, वृत्त, समानांतर रेखाएँ और त्रिकोणमिति को समझने में भी मदद करता है। NCERT की गणित सामग्री में भी कोण को दो किरणों के एक ही अंतिम बिंदु से निकलने पर बनने वाली आकृति के रूप में समझाया गया है।

कोण और कोणों के प्रकार

कोण किसे कहते हैं?

जब दो किरणें एक ही बिंदु से निकलती हैं, तो उनके बीच बनने वाले खुलाव को कोण कहते हैं।माना : बिंदु O से किरण OP और OQ निकली तो बिंदु O शीर्ष और OP और OQ भुजाएं | जिस बिंदु से दोनों किरणें बाहर निकलती हैं, उसे कोण का शीर्ष कहते हैं और दोनों किरणों को कोण की भुजाएँ कहते हैं।

कोण और कोणों के प्रकार:
कोण के कितने प्रकार होते हैं?

कोण को उसके मान (डिग्री) के आधार पर मुख्य रूप से 6 प्रकार में बाँटा जाता है:


1 .न्यून कोण (Acute Angle)

जिस कोण की माप/पैमाना 90° से कम होती है, उसे न्यून कोण कहा जाता है।

उदाहरण: 30°, 45°, 60° आदि।

यानी 90° से छोटा कोण = न्यून कोण

2 .समकोण (Right Angle)

जिस कोण की माप बिल्कुल 90° होती है, उसे समकोण कहा जाता है। इसकी आकृति सामान्यतः अंग्रेजी के बड़े अक्षर “L” जैसी प्रतीत होती है।

उदाहरण: कमरे का कोना, किताब का कोना आदि।

90° = समकोण

3 .अधिक कोण (Obtuse Angle)

जिस कोण का मान/पैमाना 90° से अधिक लेकिन 180° से कम होता है, उसे अधिक कोण कहते हैं।

उदाहरण: 100°, 120°, 150° आदि।
यानी 90° से बड़ा और 180° से छोटा = अधिक कोण

4 .सरल कोण (Straight Angle)

जिस कोण का मान /पैमाना/मैसुएमेंट ठीक 180° होता है, उसे सरल कोण कहते हैं।

यह कोण देखने में एक सीधी रेखा/LINE के समान दिखाई देता है।

180° = सरल कोण

5 .प्रतिवर्ती कोण (Reflex Angle)

जिस कोण का मान /पैमाना 180° से अधिक लेकिन 360° से कम होता है, उसे प्रतिवर्ती कोण कहते हैं।

उदाहरण: 200°, 240°, 300° आदि।

यानी 180° से बड़ा और 360° से छोटा = प्रतिवर्ती कोण

6 .पूर्ण कोण (Complete Angle)

जब कोई किरण अपने प्रारंभिक बिंदु से घूमते हुए एक पूरा चक्कर पूरा करके फिर उसी स्थिति में लौट आती है, तब इस प्रकार निर्मित कोण को पूर्ण कोण कहा जाता है।

पूर्ण कोण का माप 360° होता है।

360° = पूर्ण कोण

कुछ अन्य महत्वपूर्ण कोणों के प्रकार


7. आसन्न कोण (Adjacent Angles)

आसन्न कोण वे दो कोण होते हैं जिनका एक ही शीर्ष बिंदु और एक भुजा समान होती है तथा दोनों कोण उस समान भुजा के दोनों ओर सटे/पास-पास हुए रूप में बने होते हैं।

सरल शब्दों में, दो कोण जो एक-दूसरे के पास-पास बने हों और उनकी एक भुजा समान/बराबर हो, आसन्न कोण कहलाते हैं।

8. पूरक कोण (Complementary Angles)

जब दो कोणों का योग/जोड़ 90° होता है, तो वे पूरक कोण कहलाते हैं।

उदाहरण:

30° + 60° = 90°

इसलिए 30° और 60° पूरक कोण हैं।
दो कोणों का योग/जोड़ = 90° → पूरक कोण

9 .संपूरक कोण (Supplementary Angles)

जब दो कोणों का जोड़ 180° होता है, तो वे संपूरक कोण कहलाते हैं।

उदाहरण:

70° + 110° = 180°

इसलिए 70° और 110° संपूरक कोण हैं।

दो कोणों का योग/जोड़ = 180° → संपूरक कोण

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आसान तरीके से याद करें:

कोण माप शर्त
न्यून कोण 90° से कम
समकोण ठीक 90°
अधिक कोण 90° से अधिक और 180° से कम
सरल कोण ठीक 180°
प्रतिवर्ती कोण 180° से अधिक और 360° से कम
पूर्ण कोण ठीक 360°
आसन्न कोण पास-पास बने कोण, एक शीर्ष और एक भुजा समान
पूरक कोण दोनों कोणों का योग 90°
संपूरक कोण दोनों कोणों का योग 180°

कोण किसे कहते हैं ?

जब दो किरणें एक ही बिंदु से निकलती हैं, तो उनके बीच बनने वाले खुलाव को कोण कहते हैं।

90 डिग्री का कोण कोनसा होता है ?

समकोण |

120 डिग्री का कोण कोनसा होता है ?

अधिक कोण |

आसन्न कोण किसे कहते हैं ?

आसन्न कोण वे दो कोण होते हैं जिनका एक ही शीर्ष बिंदु और एक भुजा समान होती है तथा दोनों कोण उस समान भुजा के दोनों ओर सटे/पास पास हुए रूप में बने होते हैं।

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